मन बेशक़ निर्मल इरादें कितने सच्चे थे। रो कर मात्र सब कुछ पा लेना अच्छे थे। उम्र की मार तो रूला ही दिया 'श्रवण' हरपल मुस्कुराते थे जब तुम बच्चे थे। - श्रवण साहू